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एक ऐसा योद्धा जिसने नहीं झुकाया अकबर के आगे सिर - रंजीत राज


अपनी मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अपना पूरा जीवन का बलिदान कर देने वाले ऐसे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और उनके स्वामिभक्त अश्व चेतक को शत-शत कोटि-कोटि प्रणाम। 

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प्रतापी राजा महाराणा प्रताप 
महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड में शिशोदिया राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने कई सालों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किये। महाराणा प्रताप ने मुगलो को कई बार युद्ध में भी हराये एवं कभी भी अकबर की अधीनता को स्वीकार नहीं किये अकबर महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा शत्रु था, पर उनकी यह लड़ाई कोई व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं था, हालांकि अपने सिद्धांतो और मूल्यो की लड़ाई थी। अकबर अपने क्रूर साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था, जबकि एक तरफ महाराणा प्रताप अपनी भारत माँ की स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहे थे। अकबर और महाराणा प्रताप के बीच कई बार युद्ध हुआ। महाराणा प्रताप समय की लंबी अवधि के संघर्ष के बाद मेवाड़ को मुक्त करने में सफल रहे और वो समय मेवाड़ के लिए एक स्वर्ण युग साबित हुआ। मेवाड़ पे लगा हुआ अकबर ग्रहण का अंत 1585 ई.पू. में हुआ। कुछ दिनों के बाद उनकी मृत्यु हो गई। महाराणा प्रताप के मृत्यु पर अकबर को बहुत ही दुःख हुआ क्योंकि ह्रदय से वो महाराणा प्रताप के गुणों का प्रशंसक था, अकबर जानता था कि महाराणा जैसा वीर कोई नहीं है इस धरती पर। यह समाचार सुन अकबर रहस्यमय तरीके से मौन हो गया और उसकी आँख में आंसू आ गए। महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा को मैं नमन करता हूं।

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