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लोक सूचना पदाधिकारी द्वारा अधिकत्तर मामलों में तय समय अवधि में नहीं दी जाती है सूचना - रंजीत राज


अधिकारियों के उदासीन रवैया के कारण निष्क्रिय है सूचना का अधिकार कानून - रंजीत राज

भोजपुर : लोकतंत्र में देश की जनता के द्वारा अपनी चुनी हुए सरकार को शासन करने का अवसर प्रदान करती है और यह अपेक्षा करती है कि सरकार एवं पदाधिकारी पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का पालन करेगी। लेकिन कालान्तर में अधिकांश विभागों एवं कार्यालयों में भ्रष्टाचार बढ़ता गया। भ्रष्टाचार करने के लिए जनविरोधी और अलोकतांत्रिक तरीको को अपनाया गया। लोकतंत्र में मालिक होने के नाते जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है, कि जो  सरकार एवं पदाधिकारी उनकी सेवा में है, वह क्या कर रही है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आम आदमी के द्वारा टैक्स के रूप में सरकार को दी जाने वाली राशि का सही उपयोग हो रहा है कि नहीं इसके लिए सरकार द्वारा सूचना का अधिकार कानून लाया गया, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति टैक्स के रूप में दी गई राशि का सही उपयोग हो रहा है कि नही, जानकारी प्राप्त कर सकता है। जिसमें लोक सूचना पदाधिकारी को 30 दिन के अंदर सूचना देने का प्रावधान किया गया अगर 30 दिन के अंदर सूचना नहीं मिलने पर प्रथम अपीलीय प्राधिकार के पास अपील का प्रावधान है जिससे प्रथम अपीलीय प्राधिकार के द्वारा आवेदक एवं लोक सूचना पदाधिकारी के साथ सुनवाई कर मांगी गई सूचना दिलवाने का कार्रवाई करना है। परंतु खेदजनक यह है कि कानून बनते हैं भ्रष्टाचार रोकने के लिए पदाधिकारी के उदासीन रवैया के कारण यह कानून निष्क्रिय होकर रह गया है।

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